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तुम और तुम्हारी यादें

Bharat SinghBharat Singh November 18, 2022
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तुम और तुम्हारी यादें
संजीवनी हैं मेरे लिए
दुनिया में कहीं भी रहो 
दिल में मेरे ही तुम रहती हो
आत्मा का रिश्ता है वासना का नहीं
मैं जैसा हूं वैसा ही लिखता हूं
मैं प्यार में जीना चाहता हूं
साजिशों में नहीं
तुम एक तरफ 
सारी दुनिया एक तरफ 
तुम तुम नहीं तुम मैं हूं 

तुम और तुम्हारी यादें 
जीने का मंत्र है मेरे लिए
जपता हूं मंत्र मैं जीने के लिए 
अपने ईश्वर को मनाने के लिए
प्यार ही मेरा ईश्वर है 
तुम मेरा प्यार हो
तुम मेरी जैसी हो
तुम मेरी कविता हो
तुम से आगे मुझे कुछ नहीं दिखता 
तुम में ही मुझे दुनिया नजर आती है
तुम और तुम्हारी यादें 
संजीवनी हैं मेरे लिए
~ भरत सिंह

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