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तुम मेरा क्रश हो

Bharat SinghBharat Singh May 18, 2022
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तुम मेरी कविता हो

तुम मेरा क्रश हो 

तुम मेरी चाहत हो

तुम मेरी आहें हो

तुम मेरी सुबह हो

तुम ही मेरी शाम हो

तुम मेरा सुख हो

तुम मेरा सपना हो

तुम मुझ में हो 

मैं तुझ में हूं 

तुम मेरी हो

तुम मेरी हो

सिर्फ मेरी हो


मेरी सांसों से

अपनी सांसे जोड़ दो 

मेरे होठों से

अपने लबों को जोड़ दो 

मुझे अपना बना लो 

मैं तुम्हारे बिन

जी नहीं पाऊंगा

तुम मेरी कविता हो

तुम मेरा क्रश हो 


तुम मेरी हो 

तुम मेरी हो 

तुम्हारी आंखे

तुम्हारे गाल

तुम्हारे बाल 

तुम्हारा नाक

रोम रोम तुम्हारा

सब मेरा है 

तुम मेरी हो 

तुम मेरी हो

तुम्हारे बिन मैं अधूरा हूं

तुम मुझ में समा जाओ

मैं तुझ में समा जाऊं

मुझे अपना बना लो 

तुम मेरी कविता हो

तुम मेरा क्रश हो


तुम्हारी आत्मा का 

मैं यार हूं

मेरी आत्मा का 

तुम प्यार हो

हम दो आत्माओं 

का मिलन है

तुम्हारी सुंदरता 

का मैं कायल हूं

तुम्हारे सिवा मुझे

कुछ नहीं दिखता है

तुम ही मेरा पहला

तुम ही अंतिम प्यार हो

पास मेरे आ जाओ

पूरे संप्रण से आना

तुम्हें पास पाकर 

कहीं मैं बहक ना जाऊं

तुम मेरी कविता हो

तुम मेरा क्रश हो


पूरे ब्रह्मांड में से मैंने

तुम्हें चुन लिया है 

तुम मुझे चुन लो

तुम्हें अपने से

मैं दूर नहीं होने दूंगा

तुम मेरी हो 

तुम मेरी हो 

सदियों तक 

करना पड़ा इंतजार

तो मैं करूंगा

तुम्हारे इंतजार में

भी एक सुकून है

तुम मेरी कविता हो

तुम मेरा क्रश हो

   ~भरत सिंह


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