प्रेमिका की तलाश's image
Poetry2 min read

प्रेमिका की तलाश

Bharat SinghBharat Singh May 22, 2022
Share0 Bookmarks 361 Reads2 Likes

प्रेमिका के लिए

मेरी तलाश पूरी हुई

सामने आकर जब वो 

बिजली सी खड़ी हुई

मेरे सपनों में आने वाली 

मेरे सामने थी खड़ी हुई

मैं तो देखता रह गया

झील सी आंखों वाली

मुझको वह ढूंढ रही थी

चेहरा उसका चांद सा 

चमक रहा था 

सर पर उसके 

कोहिनूर का ताज था

बाल उसके लंबे काले

बादलों के जैसी घुमड़ के  

चांद से चेहरे को

बार बार घुंघट कर रहे थे

मुंह दिखाई जैसी वो 

मेरे से मांग रहे थे


लंबा सुन्दर 

नाक उसका 

आर्यावर्त की वो

राजकुमारी लग रही थी

होठ उसके गुलाबी 

रस टपका रहे थे 

प्यास बुझाने मेरी 

मुझको तलाश रहे थे

प्रेमिका के लिए

मेरी तलाश पूरी हुई

सामने आकर जब वो 

बिजली सी खड़ी हुई


नागिन के जैसी

बलखा के

धीरे-धीरे

मेरी तरफ वह बढ रही थी 

पक्षी भी 

उसके स्वागत के लिए 

चह चाह रहे थे 

पेड़ पौधे भी 

उसके लिए 

मध्यम मध्यम

हवा चला रहे थे 

रातरानी के फूलों ने 

पूरे समा को 

सुगंधित बना दिया 

कोयल की सी

मधुर आवाज में

जब वो बोली पिया जी 

प्रेमिका के लिए

मेरी तलाश पूरी हुई

सामने आकर जब वो

बिजली सी खड़ी हुई


देखा जब मैंने उसको 

जी भर के 

वह तो मेरी कविता थी

उसी को मैं जी रहा था

उसी को मैं लिख रहा था

वही तो मेरे सपनों

की राजकुमारी थी

मैं तो उसका कवि था

वो ही मेरी कविता थी

प्रेमिका के लिए

मेरी तलाश पूरी हुई

मेरी कविता जब मेरे 

सामने आकर खड़ी हुई

     ~भरत सिंह

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts