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मुझमें ही तुम रहती हो

Bharat SinghBharat Singh August 16, 2022
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तुम दूर मेरे से रहती हो 

बात नहीं मुझसे करती हो

मैं तुम्हें बहुत मिस करता हूं

सभी तीज त्योहारों पर तुम्हें विश करता हूं 

दूर रहकर भी 

मुझमें ही तुम रहती हो

पहुंचते होंगे मेरे एहसास तुम तक

निखर जाती होगी तुम मेरे एहसासों से

कल पूछा था तुमने 

आईने के सामने खड़े होकर  

अपने आप से 

यार प्यार तुम मुझसे क्यों इतना करते हो?


प्यार तो तुम भी मुझसे बहुत करती हो

ना जाने तुम कैसे अपनी भावनाओं को छुपा लेती हो? 

पहुंचता है तुम्हारा प्यार मुझ तक

पहुंचते हैं तुम्हारे एहसास मुझ तक 

तुम खुश रहती हो जब 

मेरे दिल में एक खुशी छाई रहती है 

मैं गाने लगता हूं , मैं नाचने लगता हूं 

मैं कविता लिखता हूं, मैं तुम्हें लिखता हूं

तुम दुखी होती हो जब 

मेरी कलम ठहर जाती है

मैं मायूस हो जाता हूं ,मेरी आंखें बरसने लगती है

दूर रहकर भी  

मुझमें ही तुम रहती हो

           ~भरत सिंह

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