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मेरी कविता

Bharat SinghBharat Singh July 20, 2022
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ओस की वह बूंद सी 

बसंत की वह बाहर सी 

फूलों का वह हार सी    

कविता है मेरी प्रियसी  

लिख रहा हूं मैं कविता 

हां 'मेरी कविता' 

 

है वह परियों सी सुंदर 

उसी के लिए लिख रहा हूं

बच्चों की वह मुस्कान सी

मां के वह प्यार सी 

बाप के वह डांट सी

कविता है मेरी प्रियसी  

लिख रहा हूं मैं कविता

हां 'मेरी कविता' 


राधा कृष्ण के प्यार सी

सीताराम के विश्वास सी

दुल्हन के वह श्रृंगार सी

ओम के ओंकार सी

लिख रहा हूं मैं कविता 

हां 'मेरी कविता' 

 

मोबाइल के वह नेट सी

व्हाट्सएप के वह चैट सी

'सेल्फी' वह प्यार सी 

कविता है मेरी प्रियसी  

लिख रहा हूं मैं कविता 

हां 'मेरी कविता' 


भरत हूं मैं विश्वास सा

राधा के मैं श्याम सा 

कविता के मैं प्यार सा  

लिख रहा हूं मैं कविता 

हां 'मेरी कविता'

       ~ भरत सिंह

              



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