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मेरी अधूरी प्रेम कहानी

Bharat SinghBharat Singh July 2, 2022
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प्रियशी को जीना 

सिखाते सिखाते

हम ही उसके 

प्यार में पड़ गए 

वो जीना सीख गई 

हम ही उसके बिना 

जीना भूल गए


मैं प्यार में हूं

मैं दूसरी दुनियां में हूं 

मैं उसके प्यार में हूं 

जो मेरी नहीं हो सकती 

किंतु मैं उसका हो गया हूं 

आत्मा से तो वह भी मेरी है 

किंतु समाजिक बंधन 

वह तोड़ नहीं पायेगी 

हम एक नहीं हो पाएंगे

किंतु प्यार करने से हमें 

कोई नहीं रोक सकता

मैं प्यार में हूं 

हम प्यार में हैं


मैं अकेला हूं 

वह मेरा प्यार है 

किन्तु वह हमसफ़र 

किसी और की है  

वह किस्मत वाला है  

उसके पास 

अमानत मेरी है 

मेरा यही नसीब 

वह प्यार ही क्या 

जो मुकम्मल हो जाए 

मेरी अधूरी प्रेम कहानी

कविता मेरी प्रियशी


मैं तुम्हें लिखना चाहता हूं 

मैं तुम्हें जीना चाहता हूं 

मैं तुम्हें पाना चाहता हूं 

तुम्हारे प्यार में 

इतना तो मैं लिख दूंगा  

तुम जीवन भर 

स्वयं पर इतरा सकती हो 

मुझे समझना है  

तो पढ़ लेना मेरा लिखा हुआ 

मैं रहूं न रहूं 

मेरा लिखा हुआ हमेशा रहेगा

मेरी अधूरी प्रेम कहानी

कविता मेरी प्रियशी


तुम अपनी कलाई में 

एक गहरे रंग वाली चूड़ी 

मेरी नाम की पहनना

जो मुझे एहसास दिलाती रहे 

की तुम मेरी हो

इतना हक तो है मेरा 

मैं तुमसे प्यार करता हूं


मुझसे बात नहीं करने की 

तुम्हारे जिद मुझे अकेलेपन 

की ओर धकेल रही है

मैं बिखर रहा हूं

ओर हां 

ख्याल रखा करो मेरा 

तुम्हारे लिए तो 

मैं छुईमुई का पौधा हूं

तुम्हारे फूंक मारने से भी 

मैं मुरझा जाऊंगा


मैं जब इस दुनियां से जाऊं 

तुम हंसते हंसते

मुझे विदा करना 

क्योंकि मैं तुम्हें रोता हुआ 

नहीं देख सकता 

मिलेंगे हम 

मैं इन्तजार करूंगा 

दरिया के पार 

मेरी अधूरी प्रेम कहानी

कविता मेरी प्रियशी

    ~भरत सिंह

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