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ठन गई मेरी करवा चौथ के चांद से

Bharat SinghBharat Singh October 13, 2022
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कविता है मेरा प्यार , कविता है मेरी प्रियसी

मैं हूं कविता का चांद , कविता है मेरी चांदनी

नजर लगा रहा था चांद उसको

घूर रहा था एकटक करवा चौथ की रात में

ठन गई मेरी करवा चौथ के चांद से

तुम डरना मत प्रियसी..

लड़ जाऊंगा मैं इस बेहया चांद से


निगाह गड़ाकर चांद की ओर 

दौड़ पड़ा मैं चांद के पीछे 

मैं जो आगे बढ़ता गया

चांद पीछे हटता गया 

डर गया चांद मेरी दीवानगी से  

छिप जाता था बादलों की ओट में

चांद आगे-आगे मैं पीछे-पीछे

दौड़ता रहा मैं रात भर  

मैं हार मानने वाला नहीं 

कविता के लिए मैं ईश्वर से भी लड़ जाऊंगा


चांद भी जल रहा था धीरे धीरे ढल रहा था

देख कर मेरा प्यार कविता के लिए  

सुबह होते-होते..

सूर्य के जैसा मेरा तेज देखकर

चांद ओझल हो गया

कविता और मेरा प्यार विजयी हो गया

हार गया चांद मुझसे , करवा चौथ की रात में

कविता है मेरा प्यार , कविता है मेरी प्रियसी

मैं हूं कविता का चांद , कविता है मेरी चांदनी


   ~ भरत सिंह 



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