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इंतजार है मुझे उस हमारी रात का

Bharat SinghBharat Singh October 3, 2022
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इंतजार है मुझे  

उस हमारी रात का

चांदनी रात में 

तारों की छांव का

अपनी चांदनी को

जी भर के देखूंगा

उसकी आंखों में

मैं डूब जाऊंगा

इंतजार है मुझे  

उस हमारी रात का

चांदनी रात में 

तारों की छांव का

   

अपनी कविता को

सामने बिठा कर 

अपनी सारी 

कविताएं सुनाऊंगा

हाल मैं उसको

अपना सुनाऊंगा

तारों को 

साक्षी मान कर 

ईश्वर से मैं

उसको मांग लूंगा

इंतजार है मुझे  

उस हमारी रात का

चांदनी रात में 

तारों की छांव का


बाहों में उसको भर 

मैं तो झूम जाऊंगा 

प्यार वाली धुन

मैं बजाऊंगा

प्यार वाले गीत

उसको सुनाऊंगा

अपने सपने को 

मैं जी भर जीवूँगा

इंतजार है मुझे  

उस हमारी रात का

चांदनी रात में 

तारों की छांव का


उसकी जुल्फों

की खुशबू से मैं तो

मदहोश हो जाऊंगा

प्यार वाली बारिश में 

हम तो भीग जाएंगे 

अपने महादेव से मैं 

उसको मांग लूंगा

ऐसे ही हम अपनी

शिवरात्रि मनाएंगे

सदा सदा के लिए 

हम एक हो जाएंगे


अपनी आंखों के सामने से 

प्रियशी को दूर नहीं होने दूंगा

प्यार वाली रात को 

मैं वहीं रोक दूंगा

सुबह नहीं मैं होने दूंगा

इंतजार है मुझे  

उस हमारी रात का

चांदनी रात में 

तारों की छांव का

   ~भरत सिंह



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