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चौराहे पर खड़ा हूं

Bharat SinghBharat Singh September 14, 2022
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निकल पड़ा हूं 
तुम्हें पाने के लिए 
चल रहा हूं 
जैसे सदियों से..
थक गया हूं 
हारा नहीं हूं
आ जाओ तुम पास में 
चूम लो माथा मेरा 
लगा लो सीने से मुझे 
चौराहे पर खड़ा हूं 

किस दिशा में तुम छुपी हो 
मेरी दिशा मुझे दिशा दिखा दो 
रुकूंगा नहीं 
मैं आगे बढूंगा 
तुम्हारी सांवली सूरत 
मेरी आंखों में बसी है  
तुम ही मेरी मंजिल हो 
भेष बदलकर तुम आ जाओ 
अपने पथिक को पानी पिला दो
पसीना पूछ कर 
अपने पल्लू से हवा लगा दो 
हौसला तुम मेरा बढ़ा दो
चौराहे पर खड़ा हूं 

अपने मिलन की मंजिल बता दो
कहां हो तुम आ जाऊंगा मैं  
पैदल ही तुम्हारे पास 
चाहे करनी पड़े मुझे पृथ्वी की परिक्रमा 
तुम्हें पाने के लिए
अपने शहर का मुझे नाम बता दो 
अपने फ्लैट से सफेद झंडा लहरा दो
अपने पथिक को रास्ता दिखा दो
निकल पड़ा हूं 
तुम्हें पाने के लिए 
चल रहा हूं 
जैसे सदियों से
थक गया हूं 
हारा नहीं हूं
चौराहे पर खड़ा हूं 
       ~भरत सिंह

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