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प्रेम निवेदन

Bharati BindooBharati Bindoo July 2, 2022
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एक मनुहार है प्रिये!
मान भी जाना आज!

पंथ आंख बिछाए बैठी हूं 
मंद मंद देखो!आना आज! 

किया है संपूर्ण समर्पण मैंने
अपूर्ण समझ न तजना आज ! 

तुम जरूरत नहीं एक आदत हो
मेरी एक मात्र अपाहिज चाहत हो!!

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