विलक्षण व्यंजना's image
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जीवन सुंदरम मौन विषाद: पल पल सुखद ढेरे 
उलझन विकार छोड़ गई वेशभूषा टूट रही तेरे ।।

कंगना, चूड़ी,बिछिया,पायल विशाल यह जीवन
सिंदूरी उजड़ी माथे हाथ जग तान से बातें फेरे ।।

प्रत्यक्ष मानस दीप प्रज्ज्वलित करके नैवेद्य अर्पण
भावनाएं आहत जगत से यह वैभव प्राण पर मेरे ।।

••• विलक्षण उपाध्याय (भारमल गर्ग)

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