Ghar's image
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ठिकाना इन परिंदों का कोई शजर होगा

दूर ही सही तेरा भी कोई घर होगा

थक गए हैं जानिब--मंज़िल को चलते चलते

ना जाने कब ख़त्म ये सफ़र होगा

आज की बस सोच कर बढ़ रहे राह में

कल का जाने कौन क्या मंज़र होगा

मिला कर हाथ भी ना जान पाओगे ‘हर्षित

किसकी बाँह में छुपा ख़ंजर होगा


-Harshit

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