सत्य और न्याय's image
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कहते हैं सभी सत्य की जीत होती है| देर से ही सही पर सत्य को न्याय जरूर मिलता है| वर्तमान समय तो कलयुग है पर क्या पूर्व में भी सत्य की जीत हुई| जब भी इस बारे में सोचता हूँ मेरे मन में एक ही ख्याल आता है क्या माता सीता को न्याय मिला, क्या प्रभु राम को माता सीता के साथ सजा नहीं मिली| अगर इसका जबाब हां है तो फिर सत्य कहाँ जीता| निर्णय उस वक्त भी सत्य के आधार पर नहीं लिया गया | वर्तमान समय में भी निर्णय लेते समय अपना स्वार्थ सर्वोपरी रख कर निर्णय लिया जा रहा है, जिससे सत्य और न्याय को क्षति पहुँचना स्वभाविक है| हर युग में निर्णय का अधिकार उसी के पास या अधीन रहा है जिसके पास सत्ता होती है| यही कारण है कि सत्य और न्याय को परे रख कर वह निर्णय लिए जाते हैं जिससे शासक खुश हो| निजी स्वार्थ सर्वोपरि हो गया है| न्याय सिर्फ उन्ही मामलों में मिलता है जिनसे शासक को कोई फर्क नहीं पड़ता हो|


( यह मेरे निजी विचार हैं, इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है)

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