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रिश्तों में दूरी

Bechain SinghBechain Singh October 24, 2022
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रिश्ते बिछड़ रहे हैं सारे, 

मोबाइल के शोर में, 


अपने भी अब हुए पराए, 

इंटरनेट के दौर में,


व्हाट्सएप और फेसबुक 

के दोस्त हुए अब प्यारे हैं,


बात करने का समय नहीं, 

हम बस चैटिंग के सहारे हैं, 


अपनों से दूरी लेकिन, 

दुख में बहुत सताती है, 


चाहे कितने भी बडे़ हो जाएं, 

याद माँ कि तब आती है, 


जिसने हमको जन्म दिया, 

जिसने हमको पाला है, 


मोबाइल और सोशल साइट्स

के चक्कर में हमने सबको टाला है, 


बढ़ रहा है अब अकेलापन, 

मायूसी, दुख और तनाव,


अपनो से दूरी के कारण, 

नासूर बन गया है घाव, 


प्यार खो दिया अपनो का, 

हम किस्मत के मारे हैं, 


रिश्ते दूर हुए हैं सारे, 

हम मोबाइल के सहारे हैं,


देर नहीं अब भी हुई है, 

हमको अब संभलना होगा, 


हाथ पकड़ कर रिश्तों का, 

हमको साथ चलना होगा, 


करलो निर्णय अब बेचैन, 

क्या चाहिए साथ में, 


अपनो का प्यार चाहिए, 

या मोबाइल चाहिए हाथ में 

या मोबाइल चाहिए हाथ में|


"बेचैन"

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