मैं तेरी आखों के सामने रहूँ, या ओझल रहूँ's image
Poetry PagesPoetry2 min read

मैं तेरी आखों के सामने रहूँ, या ओझल रहूँ

Bechain SinghBechain Singh December 7, 2022
Share0 Bookmarks 77 Reads1 Likes



मैं तेरी आखों के सामने रहूँ, या ओझल रहूँ, 

कोशिश है मेरी, मैं जो आज हूँ, वही कल रहूँ, 


जरूरतें हमें साथ रहने न देंगी,

समय के साथ दूरी लाजमी है, 

मैं तुझसे दूर रहूँ या तेरे करीब रहूँ, 

मैं तेरी यादों में हर पल रहूँ, 


ख्वाब पूरे हों तेरे सब, यही तमन्ना है, 

मैं तेरे जीवन के हर एक पल में रहूँ,


तेरे बगैर ये दुनिया विरान लगती है,

मैं चाहे किसी भी महफ़िल में रहूँ,


ख्वाब है तू ही, तू ही मेरी हकीकत है, 

जनम-जनम, हर जनम मैं तेरे दिल में रहूँ,


दुनिया कुछ नहीं है "बेचैन" मेरी तेरे सिवा, 

चैन की नींद मिले जो मैं तेरे आंचल में रहूँ,


मैं चाहे तेरी आखों के सामने रहूँ, या ओझल रहूँ, 

कोशिश है मेरी, मैं जो तेरे लिए आज हूँ, वही कल रहूँ|


मैं तेरे सामने रहूँ या ओझल रहूँ, 

मैं जो आज हूँ वही कल रहूँ, 


चाहतें कब किसी की पूरी हुईं, 

साथ तेरा मेरे नसीब में नहीं, 

ख्वाब में ही सही, तू मेरे साथ तो है, 

थम जाए यह पल और मैं इसी पल में रहूँ,


दुनिया कुछ नहीं "बेचैन" मेरी तेरे सिवा, 

चैन की नींद मिले जो मैं तेरे आंचल में रहूँ,


मैं तेरी आखों के सामने रहूँ, या ओझल रहूँ, 

कोशिश है मेरी, मैं जो आज हूँ, वही कल रहूँ|


"बेचैन"

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts