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धार छंद "आज की दशा"

Basudeo AgarwalBasudeo Agarwal July 13, 2022
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अत्याचार।

भ्रष्टाचार।

का है जोर।

चारों ओर।।


सारे लोग।

झेलें रोग।

हों लाचार।

खाएँ मार।।


नेता नीच।

आँखें मीच।

फैला कीच।

राहों बीच।।


पूँजी जोड़।

माथा मोड़।

भागे छोड़।

नाता तोड़।।


आशा नाँहि।

लोगों माँहि।

खोटे जोग।

का है योग।।


सारे आज।

खोये लाज।

ना है रोध।

कोई बोध।।

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धार छंद विधान -


"माला" वार।

पाओ 'धार'।।


"माला" = मगण लघु

222 1 = 4 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद।

4 चरण, 2-2 या चारों चरण समतुकांत। 

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' ©

तिनसुकिया

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