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मैं कान्हा हो चुका हूं उसका...

Badri Nath KoiriBadri Nath Koiri January 10, 2023
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लगाने को तुम पर कोई कयास तक नहीं है
बुझाने को तुम्हारे पास प्यास तक नहीं हैं ,
ना तेरे पास धूप है ना ही पानी
फिर भी जी रही वह तेरी जवानी ,
ना तू हवाएं दे सकता है ना समंदर
फिर भी वह कैसे रहती है तेरे अंदर ,

हर दुआओं में मांगे जाने वाली अरदास वही है 
दिल से जो कभी ना उतरे वह विश्वास वही है ,
अब तो पूछने लगा है चांद मुझसे
वह कब हो रही है आज़ाद तुझसे,
यह बात कैसे कहूं ए चांद तुझसे
वो खुद देखती है चांद मुझमें ,
कैसे कहूं,
इस कोयले रूपी माटी की वो हीरा बन बैठी है
मैं कान्हा हो चुका हूं उसका, वह मीरा बन बैठी है ।

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