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ऐ जिंदगी न कर इतना प्यार मुझे |

Badri Nath KoiriBadri Nath Koiri August 24, 2022
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सीधा साधा सरल संभला हूं मैं
किसे फसाने का रिस्क लिया है तूने,
आधा अधूरा हूं इन भाषाओं में
फिर भी क्यों मुझसे इश्क किया है तूने।
इश्क मेरा रुला देगा हर बार तुझे,
ऐ जिंदगी न कर इतना प्यार मुझे।

मेरे दुखों में हंसती है
मेरे खुशियों में तू रोती है,
रात रात भर मुझे जगा के
कैसे खुद चैन से तू सोती है।
क्या चाहिए बस बता दे एक बार मुझे,
ऐ ज़िंदगी न कर इतना प्यार मुझे।

न ही तेरे साथ में,
किताबें मोहब्बतों की पढ़ सकता हूं मैं,
न ही तेरे कहने पर,
सीढ़ीयां मौत की चढ़ सकता हूं मैं।
स्वीकार नहीं तेरा मोहब्बतें इजहार मुझे,
ये जिंदगी न कर इतना प्यार मुझे।

इतना भी न जोड़ दे मुझे 
कि कहीं मैं ही घट जाऊं,
तेरी समस्याएं सुलझाते सुलझाते
ऐसा न हो कहीं मैं ही छट जाऊं।
क्यों टेंशन देती है तू हजार मुझे,
ऐ जिंदगी न कर इतना प्यार मुझे।

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