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#मजबूरी है साहब

babusaheb devbabusaheb dev October 30, 2021
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ये क़िस्मत का लिखा नही है,

मजबूरी है साहब,मजबूरी है ।।

जो देखा था ख्वाब मैंने-२

वो ख्वाहिशें अभी अधूरी है ।।

मजबूरी है साहब,मजबूरी है ।


मेरे हालात पे हँसने वाले, 

मेरा हाल तू क्या जाने ।

ख़ुद को मानते हो बेदाग जो तुम,

अतीत में नही है तुझमे दाग तो माने ।।

किसी का दोष छिपा हुआ है,

किसी का दोष खुला हुआ है,

अब, कौन चुप रहेगा, कौन बोलेगा-२

ये देखना भी बहुत जरूरी है,

ये क़िस्मत का लिखा नही है,

मजबूरी है साहब, मजबूरी है ।।


             - "बाबुसाहेब देव"✍️




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