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जब जब तेरी बन्सी, अधरो को चूम जाती है ।

राधा रानी दौड़ी दौड़ी यमुना के तट पे आती है ।

नाचे सब ग्वाल बाल ग़इया चराते है ।

तेरी हर छवि हमको अब तड़पाती है।


अधरो पे बन्सी, सिर मोर मुकुट सजता है।

तेरे दीदार को अब हर कोई तरसता है ।

बताओ कब आओगे और कितना लम्बा रस्ता है?

मेरी हर साँस मे अब तू ही तू तो बसता है।


अब आ भी जाओ, बुलाती यशोदा मइया है ।

सुना है यमुना तट ,सूनी कदम्ब की छइया है ।

देख लो अब रोती बिलखती यहाँ गइया है ।

सुन लो पुकार अब तो रोते बलदाऊ भइया है ।

   कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

         - बाबू प्रेम अमर

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