तु मेरे रात्रिमय जीवन मे ज्योती बनकर आई's image
Poetry1 min read

तु मेरे रात्रिमय जीवन मे ज्योती बनकर आई

Babita rajput✍️Babita rajput✍️ May 9, 2022
Share0 Bookmarks 103 Reads1 Likes
दोजख सा था जिंदगी का सफ़र मेरा
ना कोई पराया
ना कोई अपना

बंजर सा था ये हृदय मेरा
ना मुझमे कोई
ना किसी मे मैं

मकान था पर घर नही बन पाया वो मेरा
ना दर्द छुपाने के लिए माँ का आँचल
ना छाँव के लिए पिता का साया

अधरो पर क्षणभर मुस्कान की
ना कोई उम्मीद
ना कोई आंस

बेरंग सा था ये जीवन मेरा
ना कोई गीत
ना कोई राग

पर तुने तेरी चमक की ज्योती से
मेरे अंधियारे से जीवन को चमकाया
मेरे शांत पड़े सुरो को जीतकर
मुझे सुरजीत बनाया

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts