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मेरे गांव का टूटा हुआ मेरा मकान

ABHIJEET SHARMAABHIJEET SHARMA December 30, 2022
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मेरे गांव का वो टूटा हुआ मकान
मकान जहा इष्ट देवताओं का वास है
पितरों का आशीर्वाद है
दादा दादी ने साथ में किए वादे है
पिताजी की बचपन की यादें हैं
अपने आप में एक मेरे लिए संसार समान हैं
वो मेरे गांव का टूटा हुआ मेरा मकान है
धुंधली सी यादें मेरी है
एक रास्ता है छोटा सा जो मेरे घर को जाता है
एक नीम का पेड़ है 
छोटा सा मंदिर है
कच्ची पक्की सड़क है
सीढ़ियों से चढ़ कर जाता मचान है
वो मेरे गांव का टूटा वाला मेरा मकान है
अब सिर्फ यादें बाकी रह गई हैं
दीवारे सारी ढह गई हैं
पर द्वार आज भी मजबूत खड़ी है
उसको भी पंछी की प्रतीक्षा बड़ी है
अपनी जड़ों को भूल गया 
ये कैसा इंसान हैं
वो मेरे गांव का टूटा हुआ मेरा मकान है
~Abhi~

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