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हर साल रौशन रहता है यह शहर, यहाँ चिरागों से ज्यादा दिल जलते है।

Ayushmann KhurranaAyushmann Khurrana November 8, 2021
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एक नए साल की इबतिदा हो गयी, लेकिन पुराने साल की इबादत नहीं गयी

अच्छा रहा वो साल लेकिन फिर से नए इरादे लिखने की आदत नहीं गयी।

पिछले बरस के अधूरे सपनो को

बचपन के टूटे दांत की तरह तकिये के नीचे रख लेंगे

जनवरी की ठंडी धुंध को फिर से एक नए सिरे से चख लेंगे ।

पर हमारे शहर में ठंडी धुंध के झोंके आते नही।

जैसे इस शहर से मंटो के ठंडे गोश्त से किस्से जाते नहीं।

धुँधले इतने है किरदार अपने की बेदाग आईने के सामने हम अपनी आँखें मलते हैं,

हर साल रौशन रहता है यह शहर कुछ अजीब तरीके से, यहाँ चिरागों से ज्यादा दिल जलते है।

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