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चाहतों का बसेरा अब कहां होता हैं

Ayush KumarAyush Kumar August 8, 2022
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चाहतों का बसेरा अब कहां होता हैं
वो जहां होते है सब तबाह होता हैं

एक दफा दिल की सुन कर वफा कर लिया
गमों की नुमाइश अब झूठी हँसी से होता हैं

कुछ ज्यादा ही अच्छे थे हम अपने किरदार में
मगर ज्यादा अच्छा होना भी बुरा होता हैं 

मेरे हालातों से नाप लेती हैं दुनिया मुझे
यहां झूठी दिखावे की कीमत ही बड़ा होता हैं

बड़ी खुद्दारी से जीता हूं मैं अपनी जिंदगी मगर
अच्छी नियत वालो का भला आखिर कहां होता हैं 

बिन मांगे खुदा ने बहुत कुछ दिया मुझको मगर
फितरत ऐसी की जिंदगी से फिर भी शिकायत होता हैं 

चल चले 'आयुष' किसी और तरफ
इस तरफ दिल का सौदा दिमागों से होता हैं

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