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फूल/आयुष कुमार कृष्ण/हिन्दी कविता

Ayush Kumar KrishnaAyush Kumar Krishna September 25, 2022
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फूल 

तुम अब भी

वैसे के वैसे हो

कैसे? 

देने वाले बदल गए

लेने वाले बदल गए

पर तुम

वैसे के वैसे

क्या कहूँ मैं तुम्हें? 

साथी, 

जिसने उसके बाद भी साथ दिया

या फिर एक जख्म

जो उसके बाद भी

आज तक मेरे मन में

उसकी यादों के ज़हर को 

घोल घोल कर

धीरे धीरे 

तिल तिल कर 

रोज़ मार रहा है|

~आयुष कुमार कृष्ण✍️

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