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छोड़ कर आज/हिंदी कविता/आयुष कुमार कृष्ण

Ayush Kumar KrishnaAyush Kumar Krishna August 10, 2022
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छोड़ कर आज, जो जाने लगे हो
मन कहीं और , बहलाने लगे हो|

मन में कोई चोर, तो हर्गिस नहीं है
फिर भी हर बात पे,घबराने लगे हो|

अब तेरा नाम तक लेते नहीं है
फिर भी ख्वाबों में तुम आने लगे हो|

जब से तेरी बाँह पर सर रखा है
हर कही तुम नज़र आने लगे हो|

आज-कल बस यही इक चर्चा है
तुम भी मिलने मुझे आने लगे हो|

मेरी आँखों से रोज़ लड़ कर के
जीतकर भी तो शर्माने लगे हो|
            ~आयुष कुमार कृष्ण ✍️

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