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ऐ मन मेरे तू साथ चल

AwantikaAwantika June 16, 2020
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ऐ मन मेरे तू साथ चल 

कही भी चल बस साथ चल 

इस धुंध से निकल जरा 

कुछ साफ़ साफ़ न दिख रहा 

यूँ खोहरे के बिच मैं 

कब से आंखें मींच मैं 

कर रहि हूँ कश्मकश 

ऐ मन मेरे तू साथ चल ।


कहीं जहाँ मिले सुकून 

जहाँ कहीं दीवार न हो 

न साथ हो कीसी का भी 

ना जाने वाला प्यार हो 

गलत सही समझ नहीं 

ना आर पार का पता 

तू छोर सब का सोचना 

घरी बदल समय बदल 

ऐ मन मेरे तू साथ चल ।


क्यों पाप पुण्य का भय रहे 

क्यों हार जीत में फसे 

कोई मिला नहीं मुझे 

जो हर घरी सही रहे 


ये मोह सब का त्याग के 

अपने धुन के राग पे 

आगे बढ़ के देख कल 

ऐ मन मेरे तू साथ चल ।


कुछ राह ऐसे ढूंढ ले 

मंजिल नहीं जिसकी वजह 

ऐसी खुसी की खोज कर 

ना हो किसी के आसरे 

जो रिश्ते बेहिसाब हो 

बस रख उन्ही से वास्ता 

तू मन है अपने मन का कर 

न जोर तोर में फिसल 

ऐ मन मेरे तू साथ चल ।


#Awantika

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