शुभ दीपावली's image
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प्रति छत, प्रति छज्जे पे 

हुई सुशोभित दीपों की माला 

प्रखर पवन से आलिंगन करके

जीवित हो उठती लघु ज्वाला

थक चुका सूर्य का तेज भी जब 

तब भेद रही अमावस की हाला 


आज देख धरा को अम्बर बोले

कितने विचित्र सौभाग्य हमारे 

मेरे आनन पर मौन चाँदनी

तुम्हारे आंचल में झिलमिल तारे 

लो करो स्वागत पुष्पक का

तुम्हारे आँगन में श्रीराम पधारे 

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