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मन मुस्कुराये

Atul VermaAtul Verma December 24, 2022
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मुझे, तुमको छोड़कर मतलब ही नहीं


दुनिया से, रिश्तों से, अपनों से, सपनों से

कतरों से, नदियों से, बारिश, समुंदर से 

आंखों से, शय और पलकों से 

आंचल से, दिल से, न पत्तों दरख़्तों से

जिस्मो न बाहों से, रस्तों फिजाओं से 

साहिल न लहरों से, चलते न ठहरों से 

अंधे न बहरों से, न दिन और हफ्तों से 

पल से, न सदियों से, दुख से, न खुशियों से


बगीचे न बगियों से

गर्मी न सर्दियों से

बिस्तर न तकियों से

मित्रों न सखियों से

मंदिर न मस्जिद से


पर मेरा मतलब है तेरी उस एक जिद से

जिसमें तू रोता हुआ हंसता जाये

मुझे मारे तू और मन मुस्कुराये

तेरा सारा गम जमीं पे आ जाये


मुझे, तुमको छोड़कर मतलब ही नहीं

.. 





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