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मैं अकेला कहां हूं

aswal.kpaswal.kp May 4, 2022
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कभी है बना मौन मेरा सहारा।

कभी गीत संगीत से प्रेम सारा।

मिले वेदना या हँसी का सवेरा।

अकेला चला मैं घना हो अँधेरा।


तुम्हे क्या पता मैं अकेला कहाँ हूँ।

जहां रश्मियां हैं जगी मैं वहाँ हूँ।

पड़ी दूब में ओंस की बूँद मुक्ता।

मुझे नींद से है जगाती अनंता।


बहे शैलजा सर्वदा माधुरी सी।

चले साथ मेरे यही शायरी सी।

नही यूँ अकेला कभी हाथ छोड़ा।

इन्ही वादियों ने सदा नेह जोड़ा।


नई कोपलें गीत गायें सुहाना।

बड़ी दूर है घाटियों का घराना।

मुझे हर्ष है मैं अकेला नही हूँ।

जहां कोयलें गान गाती वहीं हूँ।


कल्पना

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