वाज़िब's image
जाइये जी लीजिए जिंदगी अपने मन-मुताबिक़,
वो तो महज़ इंसां निकले, जिन्हें हम समझ बैठे आक़िब,
तलाशते रहे वो अनसुने जवाब उम्र भर जैसे दोपहर,
उसका मौन बेवज़ह तो नहीं, मेरे ही सवाल होंगे बड़े वाज़िब।

#क़लम✍

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