तुलसीदास's image
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प्रेम भी तुम प्रतीक भी तुम, तुम ही हो मेरा विश्वास,
मरूथल में हों जैसे दो मृग, एक अतृप्त अधूरी प्यास,
तो क्या हुआ जो तुझे मैं न मिली, न होना तुम उदास,
बनकर मैं तुम्हारी रत्नावली, बना जाऊँगी तुम्हें तुलसीदास। 

#क़लम✍

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