तड़प's image
हो गया है सरल कितना, हर रोज़ मर-मर के जीना,
अश्रुओं के गरल को, खारे तरल को, होकर नीलकंठ पीना,
अब बिनाई भी कपड़ों की क़िस्मत-सी फटेहाल है,
अपने ही उधेड़बुन को, ख़ुद ही है नोंचना, ख़ुद ही है सीना।

#क़लम✍

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