शिखर's image
हर रोज़ काँच सा टूट के बिखर रहा हूँ मैं,
लुटकर मोहब्बत में, विरह में निखर रहा हूँ मैं,
हो गयी थी आदत जिनकी, अब बिना उनके,
उतरकर अतीत के गर्त में, वर्तमान के शिखर चूम रहा हूँ मैं।

#क़लम✍

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