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कुछ रातें रोये हम, फ़िर कुछ रातें गाये,
कुछ दिन लिखा हमने, एक शाम सबको सुनाये,
महफ़िल में भीड़ थी हँसने वालों की, किस-किस को अपना दर्द समझाये।
दोनों लगे हैं एक दूसरे को भूलने भुलाने में, ना वो हमें भूले, ना हम उनको भूल पाये।

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