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क्या है वो ? मुझे पहचान करा रहा था,
सुराही पे हाँथों से निशान बना रहा था,
लिपटकर चाँद, बादलों के आग़ोश में,
बग़ीचे की घासों को, निशा-स्नान करा रहा था।

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