फुरक़तगुज़ारी's image
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जो है बाक़ी बची जिंदगी मेरी, वो भी फुरक़तगुज़ारी में जा रही है,
बेकार थे, बेकार ही रह गये, अब तो उमर बेरोज़गारी में जा रही है,
शायद तुमसे पहले ही किसी क़ाबिल थे, जब यारों का याराना था,
जेब से नोटों की जगह पर ख़त निकल आते हैं, जिंदगी की भी उधारी बढ़ती जा रही है।

#क़लम✍

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