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छुपाकर अश्रुओं को मैंने जग को हँसाया है,
पलकों की बांध में, हृदय के सैलाब को दबाया है,
सुनाकर गीत, ग़ज़लें, नज़्में, शेर मिलती रहीं वाहवाहियां,
ख़ुद को मारकर मन में, इक वादे की ख़ातिर सिर्फ़ उन्हें जिलाया है।

#क़लम✍

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