गीत अंतिम's image
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वो कहते हैं, मेरे जाने के बाद तुम भी अपना घर बसा लेना,
होगी कोई तुम्हारे भी लिए, उसके साथ सारी उम्र निभा लेना,

पर ये बात तो बताना भूल ही गए वो, एक दिल जो उनका है मेरे सीने में,
कैसे किसी और को दे दूँगा मैं, क्या तकलीफ़ ना होगी उनको जीने में,

बस यही सोचकर मैं तमाम उम्र अकेला रह गया,
देखे थे हमने मिलकर ख़्वाब कई, मेरी ही आँखों में सब अधूरा रह गया,

अब आलम ये है, हर रोज़ आँखों से मेरी आब निकलते हैं,
ज़माना कहता है, तुम्हारे आँसू बह रहे हैं, पर किसी को ख़बर तक नहीं आंसुओं के रूप में मेरे ख़्वाब निकलते हैं,

मेरी हसरतों को कोई और जी रहा है, मेरी चाहत को कोई और पी रहा है,
अब तो हाथ भी कंपकपाने लगे हैं मेरे, कुर्ता गिर गया है नीचे, मेरा ही एक हाथ दूसरे को सी रहा है,

मैं भी ख़ुश हूँ, क्योंकि उनके चेहरे पर ख़ुशी, होंठों पर हँसी देखी है,
किनारे पर हूँ खड़ा मैं, मैंने आसमां की आग़ोश में क़ैद होती जमीं देखी है,

सबकुछ होता देख अपने ही सामने मैं भी घूँट ज़हर का पीता गया,
जानता था, हैं मज़बूर वो भी निभाने को ये रस्में, इसीलिए चुपचाप सबकुछ सहता गया,

घड़ी नज़दीक जब विरह की आयी, आँखें आज उनकी भी भर आईं,
फूट-फूटकर रोईं, बिलख-बिलखकर रोईं वो, सबने समझा जिसे विदाई,
प्रेयसी के मन की प्रीतम जाने, मन में बोला ये आँसू हैं मेरे, मैं उनका महबूब हरज़ाई,

इक अंतिम वादा दोंनो ने मिलकर साथ किया है, ना होगा मिलना अब-से, ना होंगी बातें,
है बहुत बड़ा ये जीवन, जब भी कभी तुम उदास होना, ना फ़ोन घुमाना ना बातें करना, बस याद करना हमारी मुलाक़ातें, वो ख़ुशनुमा रातें।

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