फ़िर वो याद आया's image
Share0 Bookmarks 101 Reads0 Likes
था जग भर का मन ठुकराया,
खुद को खोकर तुझको पाया,
जाने क्यूँ उसने मुझे अपनाया ?
इक शाम फ़िर वो याद आया।

अपनी बातों से उसे हँसाया,
उसकी बातों ने मुझे रुलाया,
वो पल थे हसीं जो साथ तेरे बिताया,
इक शाम फ़िर वो याद आया।

बरगद की वो शीतल छाँव,
शहर से दूर है उसका गाँव,
जाने कैसे जुबां पे उनका नाम आया,
इक शाम फ़िर वो याद आया।

आँखों से बहकर दरिया उतर आया,
मुझको ही क्यूँ प्रेम का ज़रिया बनाया ?
आज तलक़ न वो आया, सावन चला आया,
इक शाम फ़िर वो याद आया।

रह गया जो बिन तेरे अनगया,
सबकी नजरों से उसे बचाया,
डरा रहा है मेरी ही आँखों का साया,
इक शाम फ़िर वो याद आया।

मैंने जिसको न कभी हाँथ लगाया,
कमरे से मेरे जाने किसने उसे चुराया ?
मिश्री से मधुर कर्णप्रिय उसके स्वर,
मेरी बंशी को जाने किसने अपने अधरों पे लगाया।

इक शाम फ़िर वो याद आया।

इक शाम फ़िर वो याद आया।

इक शाम फ़िर वो याद आया।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts