बेचैनी's image
आजकल रातों में बड़े अज़ीब से सपनें आते हैं,
होकर बेचैन आधी रात को हम उठ जाते हैं,
मन में अब भी उनका ही ख़याल आता है, जाने कैसे होंगे ? क्या कर रहे होंगे ?
तभी याद आता है, किसी छोर पर जमीं और आसमां एक हो रहे होंगे।

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