आँधी's image
इक बात कहनी थी उससे, पर वो हाँथ छुड़ाकर चली गयी,
न देखा मुड़कर जाते हुए उसने, वो सीधे चलते चली गयी,
मेरी बर्बादियों के कुछ बरस बीते, कुछ सावन बीते, कुछ पतझर बीते,
किसी शांत से उपवन में किसी आँधी जैसे, आयी और चली गयी।

#क़लम✍

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