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यह प्रेरणा है, यह भाव है।
जीवन में लगी चोटों का, भर देता यह हर घाव है।
मानव जीवन की गाथा यह, और उसका बर्ताव है।
जेठ की तपती दुपहरी में , पीपल की शीतल छांव है।

यह प्रेम सुधा , यह रोष अनंत।
इसका ना कोई आदि ना अंत।
इसके प्रभाव से जग बदला,
बने कितने काज़ी व संत।

सुख में हो कोई या दुख में,
हर मानव मन को यह भाता है।
' कविता ' इसको हम कहते हैं।
यह जीवन - दर्पण कहलाता है।।

                                           ~आशुतोष मिश्र
                                      

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