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तेरे लौट आने की उम्मीद फिर दिल मे पलने लगी

Ashutosh TripathiAshutosh Tripathi June 16, 2020
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तेरे लौट आने की उम्मीद फिर दिल में पलने लगी

कि तारीक मक़बरो में कोई कंदील सी जलने लगी


अरसे से रुके हुए थे यह लम्ज़ तेरे जाने के बाद

कि तेरे आने की खबर सुन सांसे फिर चलने लगी


किए वादे उसने मुझसे जन्मों जन्मों के

फिर क्यों वो अपने ही कहे से बदलने लगी


है अदाकारियां कमाल की तेरे लफ्जों में मक़बूल

की पढ़कर तेरी नज़्म वो बेवफा भी नम आंखें मलने लगी


✍मक़बूल_कटनीवाला

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