जीवन's image
Share0 Bookmarks 122 Reads1 Likes
पेड़ो को देखा झुमता,
सहसा रूका, फिर पुछा,
ये मस्ती कैसी है छाइ,
ये भी कोइ उमर है,
तुम्हे तनिक लाज ना आइ।
तुनकी बिदकी फिर गुर्राइ, 
कहा, रास्ता नापो अपना,
सारी ज़न्दगी दूसरो पर लुटाइ,
तब जा के अपनी बारी है आइ,
फिर निरेख मुझे मुस्काई, 
क्यो बेसब्र बेचैन हो रहे,
त्यागो सुखो को अपनाओ कठिनाई, 
जीवन को सुगम बनाने की ख्वाहिश,
यह मिथ्या है मेरे भाई। 
  

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts