अंजाम's image
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समय अपने रफ्तार से तमाम होने को है,
कुछ भी यथावत रहना नही है,
जो सुबह की चमक है बनी सी,
कह दो उससे, ढलती शाम हो रोने को है।
अंधेरे बाहो मे समेट लेंगे उन्हे,
उजाले से भागने वाले, 
आपका यही अंजाम होने को है।
Ashutosh gautam 

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