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जाना ओ जाना ओ मेरे जाना

Ashutosh MauryaAshutosh Maurya November 17, 2022
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काली घटाओं सी जुल्फें तुम्हारी,
नीली झीलों सी आंखें तुम्हारी,
शब के जैसी लबों पे खामोशी,
ठंडी फिजाओं सी बातें तुम्हारी,
तुम हो कोई मौसम सुहाना,
बारिश का रिम झिम सा आना,
जाना ओ जाना ओ मेरे जाना,

तुम हो तो जैसे सावन बरसे,
तुम हो मिले तो बसंत खिले,
तुमसे ही फागुन के रंग है सारे,
तुमसे दिवाली के जगमग नजारे,
तुम हो मेरी खुशियों का खजाना,
तुम्हीं से रूठूं तुम्हीं को मानना,
जाना ओ जाना ओ मेरे जाना,

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