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जब कोई बात तुझपे आती है - आशु चौधरी ''आशुतोष

Ashu Choudhary AshutoshAshu Choudhary Ashutosh March 22, 2022
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छुप जाता हूँ अंधेरे में

जब कोई बात तुझपे आती है

मत बोल खुद को बुरा

मत बन तू भरोसा

तू मेरा ख्वाइश नहीं इबादत है

बस इतना जान तू याद है 

और ज़ेहन को तेरी जरूरत है

जब भी लोगों ने तुझको बुरा कहा

हमने तब मोहब्बत कुछ ज्यादा किया

जब भी तूने खुद को बुरा कहा

ना ही नींद आया ना ही करार आया

जब भी तूने खुद को बुरा कहा

तब तब मैंने खुद को मार दिया

अब भुल जा अपनी बुराई

बस देख अपनी अच्छाई

मेरा छोड़

तू बुरा बन या अच्छा

ना ही मैं बदलूंगा

और ना ही मेरी मोहब्बत बदलेगी

कर लेता हूँ अकेला खुद को

जब कोई बात तुझपे आती है

हो जाता हूँ बेचैन

जब कोई बात तुझपे आती है

करने लगता हूँ मोहब्बत बहुत ज्यादा

जब कोई बात तुझपे आती है

बचा ले अब अंधेरों से कि डर लगता है

छुपा ले अपनी बाहों में कि जिंदा रहें हम

मुस्कुरा उठते हैं होंठ मेरे

जब कोई बात तुझपे आती है

मर कर जिंदा हो जाता हूँ

जब कोई बात तुझपे आती है

छुप जाता हूँ अंधेरे में

जब कोई बात तुझपे आती है ।

-आशु चौधरी ''आशुतोष

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