Ek tukda sa aasman's image
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छोटी सी चिरैया यूँ आ फंसी पिंजर में

खुश हो उठी, समझ न पायी नई जगह को

उचक उचक कर झूम उठी

समझ न पायी नई जगह को।

मन मे उम्मीद लिए , खेल खुद के उड़ लेगी उस गगन को

कब नींद के झोंके ने आ कर

लिया बसेरा

भोर भई नयन खुले

गगन तले पिंजर में,फड़फड़ा कर

थक हार के समझ लिया

नई जगह में ढूंढ लिया खुद के लिए

एक टुकड़ा आसमान,

एक टुकड़ा आसमान तले।

एक आस लिए मन में कभी तो दिन आएगा

जब इस आसमान के टुकड़े से

उड़ना होगा उस गगन में।।











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