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Kumar VishwasPoetry1 min read

वक्ता और श्रोता

ashish.kumarmomashish.kumarmom October 13, 2021
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कौआ चौंह जग काऊँ काऊँ ते,

कोयल सुरील सुर कहाँ सुहाय।


वेद शास्त्र तब कौनय पढाय, 

जब जग मात्र श्रोता रह जाय।


जब शव्द ही हिय न तौले जाय,

सुन भाषण को भाषण दे जाय।


कोयल सुरील सुर कहाँ आय,

जब स्वान मुख ही भौंके जाय।


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